રવિવાર, 26 એપ્રિલ, 2015

रावणा राजपूत समाज की बैठक आयोजित

मदनगंज-किशनगढ़-!- मीरा बावड़ी स्थित रावणा राजपूत समाज के भवन पर रावणा राजपूत समाज की बैठक का आयोजन रविवार को किया गया। बैठक की अध्यक्षता सोहन सिंह गौड़ ने की। इस बैठक में 19 अगस्त को होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह व युवक युवतियों का परिचय सम्मेलन पर विचार विमर्श किया गया। समाज के पदाधिकारियों ने इसके लिए कई कमेटियों का गठन किया तथा उसके लिए पदाधिकारियों को दायित्व दिया। बैठक में शिवराम सिंह सोलंकी समाज के अध्यक्ष भागचन्द कछावा तथा अन्य गणमान्य जन मौजूद थे।

अखिल भारतीय रावणा राजपूत समाज

शिक्षा व संगठन से होगा समाज का विकास - तंवर

बाडमेर -अखिल भारतीय रावणा राजपूत समाज एवं सामाजिक युवा जागृति मंच के बैनर तले बाडमेर में आयोजित होने वाले दो दिवसीय रावणा राजपूत संभाग स्तरीय सेमीनार का आयोजन स्थानीय रावणा राजपूत समाज छात्रावास में बाडमेर जिलाध्यक्ष गोरधनंसह राठौड की अध्यक्षता में एवं नारायणसिंह पी रावणा, उम्मेदसिंह तंवर पूर्व यूआईटी अध्यक्ष जैसलमेर, गजेन्द्रसिंह सांखला बीकानेर संभाग प्रवक्ता काग्रेंस, नगर अध्यक्ष रेवन्तसिंह राठौड, जिलामहामंत्री ईश्वरसिंह जसोल, प्रोफेसर डॉ. निम्बसिंह पवार के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।
नगर युवा महामंत्री पृथ्वीसिंह पंवार ने बताया कि विजन के प्रथम दिन एक सत्र हुआ जिसमें परिचय कार्यक्रम व विजन की रूपरेखा तय की गई। दूसरे सत्र का शुभारम्भ मां सरस्वति के समक्ष दीप प्रज्ज्वल के साथ हुआ। नारायणसिंह पी रावणा द्वारा सामाजिक युवा जागृति विजन, २०१५ से २०२० के कार्यक्रमों को विस्तार से समझाया गया और आगामी कार्यक्रमों के स्थानों के बारे में चर्चा की गई। राष्ट्रीय संयोजक गजेन्द्रंसह सांखला ने विजन के संबंध में वार्षिक कलेण्डर जारी करने एवं विजन के माध्यम से तन-मन धन से सहयोग करने की बात कही। प्राफेसर निम्बसिंह पंवार ने समाज में शिक्षा पर विचार व्यक्त करते हुए नेतृत्व करने वाले लोगों को आगे लाने की बात कही। ओबीसी आरक्षण के संयोजक रणवीरसिंह रावणा ने ओबीसी आरक्षण के इतिहास का वर्णन करते हुए ओबीसी वर्गीकरण की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया। डॉ. गोरधनसिंह सोढा ने नसा प्रवृति के त्याग करने की बात कही। उम्मेदसिंह तवंर ने समाज के विजन को पुरे राजस्थान की प्रत्येक विधानसभा के लोगों तक पहुंचाने की बात कही। विजन में महिलाओं की भागीदारी बढाने की बात कही। साथ ही शिक्षा से समाज का विकास होगा तभी हमारा संगठन मजबूत होगा। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोरधनसिंह राठौड ने कहा कि समाज अब जाग चुका है युवा समाज की रीढ की हड्डी बने और आगे बढे साथ ही समाज को अपना राजनैतिक हक मिलना चाहिए। तथा उन्होनें कार्यक्रम में आये हुए मेहमानों का हार्दिक आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया।
पंवार ने बताया कि कार्यक्रम में अहमदाबाद, पूना, सूरत, बदौडा, डीसा, नागौर, अजमेर, सीकर एवं जोधपुर संभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें पूर्व नगर युवा अध्यक्ष हरींसह राठौड, युवा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्रसिंह दईया, पार्षद दिलीपसिंह गोगादे, पुरूषोतम सिंह सोढा शिव, नारायणसिंह पी रावणा, संतोषसिंह जसोल, शंकरसिंह अजमेर, गजेन्द्रसिंह सोजत, छेलसिंह वेडाणा, रामसिंह चाडी, रमेशसिंह शिव, मांगसिंह देवडा,अजयसिंह चौहान, विक्रमसिंह राठौड, आदि ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम का सफल संचालन जिलामहामंत्री ईश्वरंसह जसोल ने किया। इस अवसर पर दाउसिंह राजावत, भाखरसिंह सोढा, नाथुसिंह राठौड, जितेन्द्रसिंह सिसोदिया, देरावरसिंह इन्दा, लक्ष्मणसिंह, भवानीसिंह लाखाणी, हिन्दूसिंह रेडाणा, रतनसिंह राणावत, दिलीपसिंह जैसलमेर, मदनसिंह राठौड, भवानीसिंह मेपावत नगर युवा अध्यक्ष, कानसिंह कोटडा, नारायणसिंह पंवार आदि सैकडों समाज बंधुओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।

रावणा राजपूत समाज ने डाला महापड़ाव


रावणा राजपूत समाज ने डाला महापड़ाव
बाड़मेर 
रावणा राजपूत समाज ने बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर महापड़ाव डाला। प्रदेशभर से आए समाज के लोगों ने दो युवकों की हत्या को लेकर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन किया। समाज ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग उठाई। वक्ताओं ने समाज के लोगों को एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर धरना भी जारी रहा। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग रखी। कलेक्ट्रेट के बाहर आयोजित सभा को कई वक्ताओं ने संबोधित किया। पूर्व मंत्री जनार्दनसिंह गहलोत ने कहा कि समाज के दो युवकों की नृशंस हत्या की गई। मृतक के छह माह पहले जान को खतरे का अंदेशा जताने के बाद भी पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि सवाई माधोपुर में सूरवाल प्रकरण, भंवरी प्रकरण व दारिया मामले में नामजद रिपोर्ट नहीं होने के बाद भी वहां सीबीआई से जांच करवाई जा रही है। लेकिन यहां युवकों की हत्या का नामजद मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस एक माह बाद भी आरोपियों का पकड़ से बाहर होना साबित करता है कि यह सब दबाव के कारण हो रहा है। इसलिए इस मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। समाज के राष्ट्रीय संयोजक श्यामसिंह ने मामले की निंदा करते हुए कहा कि इस प्रकरण पर पूरा समाज एकजुट होकर अंतिम लड़ाई लड़ेगा। प्रदेशाध्यक्ष रिंकू कंवर ने कहा कि दोनों युवकों के परिवारों को आघात लगा है। पुलिस की ओर से पांच दिन में आरोपियों को गिरफ्तार करने के आश्वासन के बाद एक माह बीत जाने के उपरांत भी कोई किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। अब पूरे राज्य में तहसील स्तरों पर ज्ञापन देकर सीबीआई जांच की मांग की जाएगी। जयसिंह चौहान ने कहा हमारी गूंज विधानसभा तक पहुंचेगी तब हमारी जीत होगी। जिला युवाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह दईया ने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। राष्ट्रीय प्रवक्ता श्यामसिंह ने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सोहनसिंह जेतमाल ने पूरे मामले की जानकारी दी। जिलाध्यक्ष गोरधनसिंह ने सभी का आभार जताया। 
इन्होंने भी किए विचार व्यक्त 
महापड़ाव को देवाराम महाराज, चैनसिंह तिलवाड़ा, नारायणसिंह सिरोही, प्रेमसिंह, अमरसिंह पाली, किशनसिंह राठौड़, ईश्वरसिंह चौहान, चैनसिंह भाटी, जयसिंह चौहान, जयदीपसिंह चुरू, मानसिंह देवड़ा, गजेंद्रसिंह सांखला, कल्याणसिंह वीदावत, सुरेंद्रसिंह दईया, पृथ्वीसिंह पंवार, अजयसिंह कच्छावा, राजेंद्रसिंह राखी, हरिसिंह राठौड़, नाथूसिंह, पार्वती राठौड़, बंशीसिंह परिहार, नारायणसिंह दोहट, ओमसिंह देवड़ा, गुमानसिंह जोधा, जबरसिंह, राजवीरसिंह भीलवाड़ा समेत कई ने संबोधित किया। 
सीबीआई जांच की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन 
महापड़ाव के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जनार्दनसिंह गहलोत के नेतृत्व में मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। साथ ही मांगे नहीं माने जाने पर पूरे राज्य में तहसील स्तरों पर ज्ञापन व प्रदर्शन करने की चेतावनी दी। वहीं आगामी रणनीति बनाकर जोधपुर व जयपुर में महापड़ाव भी डालने की चेतावनी दी। महापड़ाव के दौरान पुलिस की व्यवस्था चाक-चौबंद रही।

राजपूतों की उत्पत्ति

राजपूत वंश की उत्पत्ति के विषय में विद्धानों के दो मत प्रचलित हैं- एक का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी है, जबकि दूसरे का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति भारतीय है। 12वीं शताब्दी के बाद के उत्तर भारत के इतिहास को टॉड ने 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, दहिया वन्श, डांगी वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, कटहरिय़ा वंश, चन्देल वंश, सैनी, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं। राजपूत सुध्ध रूप से १००% भारतीय है, इन्हें राम और कृष्ण के वंस से माना गया है !, हर्षवर्धन की मृत्यु के उपरान्त जिन महान शक्तियों का उदय हुआ था, उनमें अधिकांश राजपूत वर्ग के अन्तर्गत ही आते थे। ऐजेन्ट टोड ने 12वीं शताब्दी के उत्तर भारत के इतिहास को 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्त्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, चंदेल वंश, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं।
विदेशी उत्पत्ति के समर्थकों में महत्वपूर्ण स्थान 'कर्नल जेम्स टॉड' का है। वे राजपूतों को विदेशी सीथियन जाति की सन्तान मानते हैं। तर्क के समर्थन में टॉड ने दोनों जातियों (राजपूत एवं सीथियन) की सामाजिक एवं धार्मिक स्थिति की समानता की बात कही है। उनके अनुसार दोनों में रहन-सहन, वेश-भूषा की समानता, मांसाहार का प्रचलन, रथ के द्वारा युद्ध को संचालित करना, याज्ञिक अनुष्ठानों का प्रचलन, अस्त्र-शस्त्र की पूजा का प्रचलन आदि से यह प्रतीत होता है कि राजपूत सीथियन के ही वंशज थे।
विलियम क्रुक ने 'कर्नल जेम्स टॉड' के मत का समर्थन किया है। 'वी.ए. स्मिथ' के अनुसार शक तथा कुषाण जैसी विदेशी जातियां भारत आकर यहां के समाज में पूर्णतः घुल-मिल गयीं। इन देशी एवं विदेशी जातियों के मिश्रण से ही राजपूतों की उत्पत्ति हुई।
भारतीय इतिहासकारों में 'ईश्वरी प्रसाद' एवं 'डी.आर. भंडारकर' ने भारतीय समाज में विदेशी मूल के लोगों के सम्मिलित होने को ही राजपूतों की उत्पत्ति का कारण माना है। भण्डारकर, कनिंघम आदि ने इन्हे विदेशी बताया है।। इन तमाम विद्वानों के तर्को के आधार पर निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि, यद्यपि राजपूत क्षत्रियों के वंशज थे, फिर भी उनमें विदेशी रक्त का मिश्रण अवश्य था। अतः वे न तो पूर्णतः विदेशी थे, न तो पूर्णत भारतीय।

पिछड़ा वर्ग में 78 जाति शामिल, विशेष पिछड़े वर्ग में रावणा-राजपूत,

  पिछड़ा वर्ग में 78 जाति शामिल, विशेष पिछड़े वर्ग में नौ
Tuesday, September 01, 2009
जयपुर, 1 सितम्बर। राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर राजस्थान अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक पिछड़ा वर्ग (राज्य में शैक्षणिक संस्थाओं में सीटों एवं राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्ति के लिए आरक्षण) अधिनियम 2008 के तहत 78 जातियों को पिछड़े वर्ग के रूप में अधिसूचित किया है। अधिसूचना के अनुसार अहीर (यादव), बढ़ई, जांगिड़, खाती, सुथार, तरखान, बड़वा, जछक, भाट, जागा, राव, बागरिया, भड़भुजा, चारण, छींपा (छीपी), भावसर, नामा, खट्टी छीपा, रंगरेज, नीलगर, चौबदार, चूनगर, डाकौत, देशान्तरी, रंगासामी (अडभोपा), डांगी, दरोगा, रावणा-राजपूत, हजूरी, वजीर, दर्जी, देशवाली, धाकड़, धीवर, कहार, भोई, सागरवंशी-माली, कीर, मेहरा, मल्लाह(निसाद), बारी, भिश्ती, मछुआरा, धोबी(मुस्लिम) एवं फारूकी भटियारा को पिछड़ा वर्ग घोषित किया है। इसके अलावा गडरिया (गडरी), गायरी, घोसी(ग्वाला), गड्डी, गड़ीत नागौरी, घांची, गिरि, गोसांई (गुंसाई), हलाली, कसाई, हेला, जगरी, जन्वा, खरडिय़ा (सीरवी), जाट, जोगी, नाथ, सिद्ध, जुलाहा, कांछी (कुशवाहा), शाक्य, कलाल (टाक), कलाल (मेवाड़ा), कलाल (सुवालका), कलाल (जायसवाल), कलाल (अहलूवालिया), कलाल (पटेल), कनबी, कलबी, पटेल, पाटीदार, आंजना, डांगी पटेल, कुल्मी, कण्डेरा, पिंजारा, कायमखानी, खरोल(खारवाल), खेलदार, खेरवा, किरार (किराड़), कोतवाल, कुम्हार (प्रजापति), कुमावत, सुआरा, कुन्जड़ा, राइन, लखेरा(लखारा), कचेरा, मनिहार, लोधे-तंवर, लोधी(लोधा), लौहार, पंचाल, मदारी, बाजीगर(गैर हिन्दू जाति) को पिछड़ा वर्ग घोषित किया है। महाब्राह्मïण (अचारज), फकीर (कब्रिस्तान में कार्यरत), माली, सैनी, बागवान, मेर (मेहरात-कथाट, मेहरात-घोड़ात, चीता), मेव, मिरासी, धाड़ी, लांगा, मांगणियार, मोची (गैर हिन्दू जाति), मोंगिया (मोंग्या), मुल्तानीज, नगाड़ची, दमामी, राणा, बायती (बारोट), नाई, सैन, वेदनाई, नट (गैर हिन्दू जाति), न्यारिया (न्यारगार), ओड, ओर्फन चिल्ड्रन, पट़वा,(फडाल), रायसिख, राठ, रावत, साद, स्वामी, बैरागी, जनगम, सपेरा(गैर हिन्दू जाति), सातिया-सिन्धी, सिरकीवाल, बन्दूक साज (उस्ता), सिलावट (मूर्तिकार एवं सोमपुरा से अलग), चेजारा, सिंधी मुसलमान, सिरकीवाल, सोंधिया, स्वर्णकार, सुनार, सोनी, जडिय़ा, तमोली (तम्बोली), तेली, ठठेरा, कन्सारा (भरवा) तथा विश्नोई जाति को पिछड़ा वर्ग के रूप में घोषित किया है। ( मंगल सैणचा, बेंगलोर senacha@in.com )

ठिकाना मोटा गुडा